*धौरहरा में 15 देसी आम के पेड़ों की कटान पर घमासान, परमिट की शर्तों पर उठे सवाल — वन विभाग की चुप्पी पर भी सवाल*
धौरहरा-खीरी। थाना धौरहरा क्षेत्र से देसी आम के पेड़ों की कटान को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 15 देसी आम के पेड़ काटे जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि कटान के बाद अधिकांश लकड़ी मौके से गायब होने की बात भी सामने आ रही है। वहीं दो पेड़ों की लकड़ी मंझावा क्रेशर के पास पड़ी होने की जानकारी दी जा रही है।
मामले में मूसेपुर निवासी बबलू ठेकेदार पर मनमानी तरीके से कटान कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि संबंधित पक्ष का कहना है कि पेड़ों के लिए परमिट मौजूद है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
*आखिर परमिट किन पेड़ों के लिए जारी किया गया था*
परमिट पर उठे कई गंभीर सवाल
वन विभाग धौरहरा से अब स्पष्ट जानकारी की मांग उठ रही है कि जारी परमिट सूखे पेड़ों का था, रोगग्रस्त पेड़ों का था, कलमी आम के पेड़ों का था या देसी आम के हरे-भरे पेड़ों का?
वन रेंज अधिकारी धौरहरा को परमिट की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए मीडिया के सामने तथ्य रखने चाहिए, ताकि आम जनता के बीच चल रही चर्चाओं और सवालों पर विराम लग सके।
15 पेड़ों का परमिट होने की चर्चा, लेकिन कटान की स्थिति पर सवाल
सूत्रों के अनुसार करीब 15 पेड़ों का परमिट होने की बात कही जा रही है, लेकिन मौके पर किन पेड़ों की कटान हुई और परमिट में
*किन पेड़ों का उल्लेख है, यह जांच का विषय है*
बताया जा रहा है कि पेड़ों पर आरा चलने की जानकारी डीएफओ लखीमपुर खीरी और एसडीओ धौरहरा तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद अभी तक विभाग की ओर से मामले पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रो का कहना है कि यदि कटान पूरी तरह नियमों के अनुसार है तो विभाग को परमिट की स्थिति और कटान की वैधता स्पष्ट करने में देरी क्यों हो रही है?
लकड़ी कहां गई? यह भी जांच का विषय
कटान के बाद करीब 15 पेड़ों की लकड़ी में से अधिकांश लकड़ी मौके से गायब होने की बात कही जा रही है। वहीं दो पेड़ों की लकड़ी मंझावा क्रेशर के पास पड़ी होने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह भी सवाल है कि कितने पेड़ काटे गए, कितनी लकड़ी निकली, लकड़ी कहां ले जाई गई और क्या पूरी लकड़ी का रिकॉर्ड परमिट के अनुसार मौजूद है?
*मीडिया से बातचीत में भी उठे सवाल*
सूत्रों के अनुसार मामले की जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों से बबलू ठेकेदार द्वारा पत्रकारों की डिग्री और अथॉरिटी के संबंध में सवाल किए जाने की बात सामने आई है। इस संबंध में भी वास्तविक स्थिति संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब सवाल यह है कि यदि कटान वैध है तो परमिट सार्वजनिक कर सभी सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा? और यदि कटान परमिट की शर्तों के विपरीत हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
*वन विभाग की जांच पर टिकी निगाहें*
मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वन विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण, पेड़ों की संख्या का मिलान, परमिट की जांच और काटी गई लकड़ी का सत्यापन बेहद जरूरी है।
सरकार लगातार हरियाली बचाने और पौधरोपण को बढ़ावा देने की बात कर रही है। ऐसे में देसी आम के हरे-भरे पेड़ों की कटान के आरोपों पर यदि मामला सही पाया जाता है तो यह गंभीर विषय है।
अब देखना यह है कि वन विभाग धौरहरा और उच्चाधिकारी परमिट की सच्चाई सामने रखते हैं या मामला जांच के नाम पर फाइलों में दबकर रह जाता है।
नोट: यह खबर सूत्रों से प्राप्त जानकारी और लगाए गए आरोपों के आधार पर है। 15 पेड़ों की संख्या, लकड़ी के स्थान तथा परमिट की प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग की जांच से होना बाकी है। संबंधित ठेकेदार एवं वन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
RK TV 9 न्यूज़ तहसील धौरहरा के
ग्राम बजहा से जिला ब्यूरो चीफ प्रिया वर्मा