*ईद मिलादुन्नबी पर बिजली कटौती से रोष, हजारों की सजावट बनी शोपीस*

*ईद मिलादुन्नबी पर बिजली कटौती से रोष, हजारों की सजावट बनी शोपीस*

 

जिला ब्यूरो चीफ प्रिया वर्मा

 

लखीमपुर-खीरी। जश्ने ईद मिलादुन्नबी के पावन अवसर पर जहां शहर से लेकर गांवों तक गलियां रोशनी से जगमगाने के लिए लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई के हजारों रुपये खर्च कर तरह-तरह की लाइटों से सजावट की, वहीं बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने पूरी सजावट की चमक पर पानी फेर दिया। त्योहार के मौके पर कालाआम पावर हाउस क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि कल शाम होते ही करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जबकि आज भी उसी समय से एक घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल है। ऐसे में घरों, मस्जिदों और मोहल्लों में की गई आकर्षक विद्युत सजावट अंधेरे में कैद होकर रह गई। लोगों का कहना है कि जब त्योहार को देखते हुए महीनों से तैयारियां की जा रही थीं और हजारों रुपये खर्च कर रोशनी की व्यवस्था की गई, तब बिजली विभाग को कम से कम त्योहार के प्रमुख समय में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिजली कटौती का समय पहले से निर्धारित है तो त्योहार के मौके पर उसी समय बिजली क्यों काटी जा रही है? क्या विभाग के अधिकारियों को यह जानकारी नहीं थी कि ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर लोग अपने घरों और मोहल्लों को रोशनी से सजा रहे हैं? अगर जानकारी थी तो फिर व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि बिजली विभाग त्योहारों पर निर्बाध आपूर्ति के दावे तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत में स्थिति इसके उलट दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि हजारों रुपये की सजावट महज शोपीस बनकर रह गई और त्योहार की रोशनी बिजली कटौती के अंधेरे में दब गई। त्योहार के महत्वपूर्ण अवसर पर लगातार बिजली कटौती ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से लेते हैं या फिर हर बार की तरह जनता को कटौती और अव्यवस्था के अंधेरे में ही छोड़ दिया जाएगा। जनता का सीधा सवाल—त्योहार पर जब रोशनी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तभी बिजली क्यों गायब रही?

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