2 मीटर की सरकारी नाली आखिर 7 मीटर चौड़ी कैसे बनी “तहसील की पैमाइश पर उठे बड़े सवाल, बुजुर्ग किसान ने लेखपाल-कानूनगो पर लगाए गंभीर आरोप?
(#बीकापुर अयोध्या)
जनपद की चर्चित बीकापुर तहसील एक बार फिर सवालों के घेरे में इस बार मामला सरकारी नाली से जुड़ा है।
जहां एक बुजुर्ग किसान ने राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि महज 2 मीटर चौड़ी सरकारी नाली को कागजों में 7 मीटर चौड़ी दिखाकर उसकी जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है।
मामला ग्राम पंचायत हथिगो, मजरे पूरे राम आनंद राय का है।
जहां के पीड़ित हौसला प्रसाद राय, पुत्र स्वर्गीय राम दुलारे राय ने अपने ज्येष्ठ पुत्र के साथ पत्रकारों के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि वह कई महीनों से तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उन पर ही दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित का आरोप है कि विपक्षी राघव राम शुक्ला ,पूरे पराग मिश्र हथिगो को लाभ पहुंचाने के लिए लेखपाल और कानूनगो की कथित मिली भगत से अब तक तीन बार पैमाइश कराई गई।
निशान देही के नाम पर कथित रूप से खूंटे भी गाड़ दिए गए, जबकि मौके पर मौजूद सरकारी नाली की वास्तविक चौड़ाई सिर्फ 2 मीटर है।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि 25 मई 2026 को लेखपाल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में क्षेत्रफल का हवाला देकर 2 मीटर की नाली को 7 मीटर चौड़ा मान लिया गया।
पीड़ित का कहना है कि यदि इसी आधार पर पैमाइश की गई तो उसकी बहुमूल्य कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा चला जाएगा और विपक्षी को सीधा फायदा मिलेगा।
अब सवाल यह उठता है कि जब सरकारी नाली नक्शे में 2 मीटर की है, तो आखिर 7 मीटर चौड़ाई किस नियम और किस आधार पर तय कर दी गई ?
क्या यह महज तकनीकी भूल है या फिर किसी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अभिलेखों से खेल किया जा रहा है?
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि तहसील और पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार उन पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही।
अब निगाहें तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पैमाइश में गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? या फिर एक बुजुर्ग किसान न्याय के लिए यूं ही दफ्तरों की चौखट नापता रहेगा?
यदि लगाए गए आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल एक किसान की जमीन का नहीं, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ब्यूरो रिपोर्ट