बाँसवाड़ा, राजस्थान
रिपोर्ट–धर्मेन्द्र कुमार सोनी, बाँसवाड़ा, राजस्थान
स्लग–5 करोड़ की लागत से बने CHC का कब होगा लोकार्पण, सरकार कब भेजेगी अस्पताल में प्रयाप्त स्टाफ
राजस्थान के जनपद बाँसवाड़ा के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की मोहकमपुरा में पूर्व कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहें अशोक गहलोत ने कुशलगढ़ विधायक रमीला हुरतिंग खडीया की पहल पर मोहकमपुरा में 5 करोड़ की लागत से बनें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देकर एक बड़ा तथा सर्व सुविधा युक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का 5 अक्टूबर 2023 को विधिवत उद्घाटन किया था तब मोहकमपुरा, सातलिया, भवरदा व आस–पास के आमजनों को लगा था की नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने से गरीब मरीजों को सरकारी व मुफ्त ईलाज मुहैय्या होगा मगर गरीबों का यह सपना सिर्फ सपना ही बनकर रगया एंसा दिखाई देता नजर आ रहा है | 5 करोड़ की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन बनकर पूरा तरह तैयार होने के बाद भी अब यह अस्पताल लोकार्पण की बांट जोहता नजर आ रहा है आख़िर ऐसा क्यों हम आपको बता दे की जब नया भवन पूरी तरह तैयार हैं तो मौजूदा सरकार प्रशासनिक अधिकारी व चिकित्सा विभाग लोकार्पण क्यों नहीं करवातें कहीं न कहीं या तो राजनीतिक दलों की हट धर्मिता कंहे या जान बुझ कर दाने डाल कर मुर्गों को लड़ाने की कंही चाल तों नहीं इधर जब हमने युवा शिक्षित समाज सेवी पाटडी निवासी दीनेश भुरीया से पुछा तो भुरीया ने कंहा की यह क्षेत्र नान कंमाडं है अत्यधिक गरीब इलाका हैं | कुछ ही दिनों में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव होनेवाले हे इन मुद्दों पर जो राजनीतिक दल जनता का भरोसा जीतेंगे वो ही जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे नागनाथ, सांपनाथ वाला रवैया अब बर्दाश्त नहीं होंगा इतना ही नहीं सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो बना दिया लोकार्पण नहीं किया इस बड़े अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है वैसे भी कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान विधायक रमीला हुरतिंग खडीया ने अस्पतालों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कुशलगढ़ उप खंड अधिकारी को कांग्रेस पार्टी के बेनर तले स्टाफ लगाने व ईलाज हेतु जनता का दर्द ज्ञापन के माध्यम से सरकार को कुंभकर्ण की निंद सोई सरकार को जगाने की भरपूर कोशिश की तब लगा था की अब कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में अस्पतालों की दशा व दिशा अब सुधरेगी मगर सरकार व प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली इसी के चलते गरीब मरीजों को ईलाज हेतु तथाकथित निम हाकीम झोला छाप बंगाली डाक्टरों के षोषण का शिकार होना पड़ता है वहीं पुरा स्टाफ नहीं होने से मध्यप्रदेश व गुजरात में ईलाज के लिए जाना गरीबों की मजबूरी नहीं तो क्या |
रिपोर्ट–धर्मेन्द्र कुमार सोनी, बाँसवाड़ा, राजस्थान