बाँसवाड़ा, राजस्थान
रिपोर्ट–धर्मेन्द्र कुमार सोनी, बाँसवाड़ा, राजस्थान
स्लग–हिन्दू सम्मेलन का आयोजन : सनातनी परम्परा, माँ शबरी, रत्नाकर और एकलव्य का प्रेरक उदाहरण
अगली ख़बर हैं राजस्थान के जनपद बाँसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांव
बिजोरी छोटी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की महान परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया | वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का जीवन दर्शन है | इस सम्मेलन में माँ शबरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सच्ची भक्ति में जाति-पाति का कोई भेद नहीं होता हैं | शबरी माता ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीराम को बेर अर्पित किए, और भगवान ने उनकी भावना को स्वीकार किया | यह प्रसंग समरसता और समानता का संदेश देता है | इसी प्रकार रत्नाकर का उल्लेख किया गया, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की | यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन धर्म में आत्म परिवर्तन और साधना के द्वारा महानता प्राप्त की जा सकती है | इसके साथ ही एकलव्य का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया | एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन गुरु मानकर कठिन साधना की और अद्वितीय धनुर्धर बने | जब गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठा मांगा गया, तो उन्होंने बिना संकोच उसे अर्पित कर दिया | यह प्रसंग गुरु-भक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है | जबकि इस सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि सनातन परम्परा हमें भक्ति (शबरी), आत्म परिवर्तन (रत्नाकर) और गुरु-निष्ठा (एकलव्य) का मार्ग दिखाती है | समाज को इन आदर्शों को अपना कर समरस, संस्कारित और संगठित बनाना चाहिए | इस अवसर पर वक्ता मधुसूदन व्यास नरसिंह गिरी महाराज लालचन्द भाभोर मानसीह डाबी सहित अन्य लोग भी मौजूद थे |
रिपोर्ट–धर्मेन्द्र कुमार सोनी, बाँसवाड़ा, राजस्थान