खाकी पर दाग: दबंगों के आगे पयागपुर पुलिस नतमस्तक, न्याय के लिए दर-दर भटक रही माँ-बेटी
बहराइच। उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक ओर महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का दावा कर रही है, वहीं जनपद बहराइच के थाना पयागपुर क्षेत्र से सामने आया एक सनसनीखेज मामला इन दावों की जमीनी हकीकत उजागर कर रहा है। ग्राम पंचायत खुनौरा में दबंगों द्वारा एक परिवार पर किए गए कथित जानलेवा हमले, लाखों की लूट और उसके बाद पुलिस की संदिग्ध भूमिका ने पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। पीड़ित माँ-बेटी पिछले करीब 25 दिनों से अपने ही घर से बेघर होकर न्याय की तलाश में भटक रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक न सुरक्षा मिली और न ही इंसाफ।
पीड़ित परिवार के अनुसार दबंगों ने योजनाबद्ध तरीके से उनके घर पर हमला बोला। आरोप है कि हथियारों से लैस हमलावरों ने घर में घुसकर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना के दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरे, वाईफाई सिस्टम और इन्वर्टर को भी तोड़ दिया गया, ताकि हमले से जुड़े डिजिटल सबूत नष्ट किए जा सकें। परिवार का आरोप है कि हमलावर घर से लगभग 10 लाख रुपये के जेवरात और अन्य कीमती सामान भी लूट ले गए।
सबसे गंभीर आरोप स्थानीय पुलिस पर लग रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि जब वे थाना पयागपुर पहुंचीं और पुलिस से शिकायत दर्ज करने की मांग की, तो उनकी मदद करने के बजाय उन्हें ही डराया-धमकाया गया। आरोप है कि थाने में मौजूद एक पुलिसकर्मी ने कहा कि “अगर दोबारा प्रार्थना पत्र दिया तो तुम्हें ही जेल भेज दूंगा।” पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस की इस धमकी के बाद उनका भरोसा कानून व्यवस्था से पूरी तरह उठ चुका है।
स्थानीय थाने से निराश होने के बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस अधीक्षक कार्यालय बहराइच पहुंचीं, लेकिन वहां भी केवल आश्वासन मिला। आखिरकार न्याय की उम्मीद में उन्हें देवीपाटन मंडल गोंडा स्थित आईजी कार्यालय तक गुहार लगानी पड़ी। सवाल यह उठता है कि आखिर एक पीड़ित परिवार को अपनी शिकायत दर्ज कराने और सुरक्षा पाने के लिए जिला से लेकर मंडल स्तर तक भटकना क्यों पड़ रहा है?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंग लगातार व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि यदि वे दोबारा अपने घर लौटने की कोशिश करेंगे तो पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। भय और असुरक्षा के माहौल में जी रही माँ-बेटी पिछले कई दिनों से रिश्तेदारों और परिचितों के यहां छिपकर रहने को मजबूर हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या थाना पयागपुर पुलिस दबंगों के दबाव में काम कर रही है? आखिर सीसीटीवी और अन्य डिजिटल सबूत नष्ट होने के बावजूद पुलिस ने अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की? महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के सरकारी दावों को स्थानीय स्तर पर क्यों कमजोर किया जा रहा है?
क्षेत्र में यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो दबंगों के हौसले और बढ़ेंगे तथा आम जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। अब निगाहें उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या फिर सत्ता और संरक्षण के दम पर दबंग कानून को यूं ही चुनौती देते रहेंगे।