बाँसवाड़ा, राजस्थान

बाँसवाड़ा, राजस्थान

 

 

रिपोर्ट–धर्मेन्द्र कुमार सोनी, बाँसवाड़ा, राजस्थान

 

 

स्लग–चीरा बावसी की पूजा–अर्चना कर विधि–विधान से गीत–गाकर पूर्वजों को किया गया याद

 

 

आज हम राजस्थान के जनपद बाँसवाड़ा के कस्बा कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांदवन के दर्रा गांव में भी चीरा बावसी के स्थान पर पुजा अर्चना कर मंगल गीत नृत्य किया जो हमारी पुरानी संस्कृति को दर्शाता है | जबकि अटुट श्रद्धा भक्ति और आस्था के साथ आज भी पूजे जातें हैं | पूर्वज भले ही हमारे भारत देश में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने–अपने धर्म ग्रंथों व परमात्मा को बड़ी श्रद्धा भक्ति और आस्था के साथ ईश्वर की पूजा अर्चना की जाती है | सभी धर्म के लोग अपने अपने रीति रिवाज के अनुसार देवी-देवताओ को पुजते है | वहीं हमारे भारत देश में पूर्वजों को भी पूजा जाता है इन पूर्वजों की याद में चीरा बावसी का एक थानक बना कर चिरा बावसी की पूरे विधी विधान से स्थापना की जाती है | वही स्थापना के बाद हर त्यौहारों पर चीरा बावसी के दर पर जा कर लोग श्रद्धा भक्ति और आस्था के साथ यहाँ मन्नत मांगते हैं | जबकि मन्नत पुरी होने पर चीरा बावसी पर विधिवत पूजा अर्चना कर रात्रि जोगा का आयोजन किया जाता है | सर्व समाज व पूरे कुटुम्ब व गांव तथा रिश्तेदारों को न्यौता देकर इस परम्परा को आज भी जीवित रखा है | जबकि जानकारी देते हुए राकेश निनामा, रामचंद्र निनामा, राहुल,भारत , प्रभुलाल मानसिंह,भीमा व रामचंद्र व पुरे परिवार सगा संबंधियों इन सभी ने मिलकर चीरा बावसी की पूजा–अर्चना कर गीत गाकर व नृत्य कर पुर्वजों को याद किया |

 

 

रिपोर्ट–धर्मेन्द्र कुमार सोनी, बाँसवाड़ा, राजस्थान

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