*फीस के लिए सैकड़ों बच्चों एवं अभिवावकों को वर्षों से प्रताडित कर रहा विद्यालय संचालक।*

*फीस के लिए सैकड़ों बच्चों एवं अभिवावकों को वर्षों से प्रताडित कर रहा विद्यालय संचालक।*

 

राजबहोर यादव कुसमी।

 

सीधी जिले के कुसमी जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत ग्राम पंचायत भदौरा में संचालित हंस वाहिनी विद्या मंदिर भदौरा का मामला सामने निकल कर आया है जहां सैकड़ो बच्चों की फीस जमा नहीं होने से 3 वर्षों से बच्चों एवं अभिभावकों संस्था प्रमुख के द्वारा अलग अलग तरीके से प्रताड़ित किया जा रहा है। एवं संचालक द्वारा कई तरह के शुल्क बताकर एवं प्रताड़ित करके कई अभिभावकों से पैसो की वसूली की भी गई है।

मामले में सुखसेन जायसवाल ने जानकारी देकर बताया कि हंस वाहिनी विद्या मंदिर भदौरा के संचालक के द्वारा लगभग 3 वर्षों से मेरे बच्चे की फीस की चर्चा की जा रही है जिसको लेकर आये दिन बच्चे को परेशान किया जा रहा है। और अब इस बार मुझे एवं सैकड़ो लोगों को नोटिस भेज कर कहां जा रहा है कि अगर तुम सभी लोग अपने बच्चो की फीस नहीं जमा करते हो तो बच्चे को न तो परीक्षा में बैठने दिया जाएगा और न ही विद्यालय आने दिया जाएगा,जिसको जो करना है कर लो।

इस तरह से करीब सैकडो अभिभावक प्रताडित हैं जो विद्यालय संचालक के प्रताडना से 3बर्षो से प्रताड़ित होते आ रहे हैं।अभिवावकों ने कुसमी एसडीएम और जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

*नहीं मिल रही सुबिधा*

मामले में कई अभिवावकों ने जानकारी देकर बताया कि हंस वाहिनी विद्या मंदिर भदौरा में जिस हिसाब से बच्चों की शुल्क हम लोगों से वशूली और मांगी जा रही है उस हिसाब से विद्यालय में ऐसी फैसिलिटी भी नहीं है जिससे उनको इतनी शुल्क दी जाय।

अभिवावको ने बताया कि विद्यालय में खेल का मैदान काफी छोटा यानी न के बराबर है।जिससे बच्चे खेल नहीं पाते साथ ही ऐसे शिक्षकों को रखा गया है जो कागजों में तो नाम किसी और का हैं लेकिन पढ़ाने कोई और पहुंच रहे हैं। और ऐसे शिक्षको उनको कम पैसो की लालच देकर पढ़वाया जा रहा है। उन शिक्षकों का भी शोषण कर रहे हैं।बच्चों को पानी पिलाने तक की व्यवस्था सही नहीं है। पीने के लिए पानी एवं शौचालय के लिये जो सुविधा मिलनी चाहिए वह शासन के नियमानुसार सुविधाऐ हमारे बच्चों को नहीं दी गई है।फिर फीस पूरी मांगना न्याय संगत नहीं है।

*कई बार मामले की शिकायत*

पूरे मामले की शिकायत कई बार विकासखंड के अधिकारियों को अलग-अलग अभिभावकों ने फोन माध्यम एवं लिखित माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी जाती रही है और अधिकारी एक एक अभिवावकों को अलग अलग तरीके बताकर भ्रमित कर मामला रफा दफा कर दिया जाता रहा है।पर शासन के नियमों के आधार पर सारी मिलने वाली व्यवस्थाओं को अनदेखा करते हुए विद्यालय को अनुमति दे दी जाती रही है।

देखना दिलचस्प होगा कि अब एक साथ इतने बच्चों के अभिभावकों को नोटिस मिलने पर शिक्षा विभाग खंड अधिकारी विद्यालय की जांच करेंगे या अभिवावकों को कोई राहत मिलेगी।

 

हंसवाहिनी प्रायवेट विद्यालय में छात्रों से फीस जमा करने के मामले की जानकारी मिली है इसकी जांच की जायेगी।

 

*बीआरसीसी कुसमी*

*अंगिरा प्रसाद द्विवेदी*

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