उन्नाव जिले से एक पीड़ित मुख्यमंत्री के दरबार में शिकायत करने लखनऊ आया । किसी कारण वश पीड़ित प्रार्थना पत्र नही दे पाया ।

उन्नाव जिले से एक पीड़ित मुख्यमंत्री के दरबार में शिकायत करने लखनऊ आया । किसी कारण वश पीड़ित प्रार्थना पत्र नही दे पाया ।

 

पीड़ित उन्नाव निवासी सुमित कुमार का आरोप है कि सिविल लाइन 881 उन्नाव स्थित निष्ठा अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने पीड़ित की पत्नी का 16 मार्च 2025 को जबरन ऑपरेशन (सीजर) कर दिया, जबकि लखनऊ माही डायग्नोस्टिक सेंटर आलमबाग में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन की कोई आवश्यकता नहीं थी। पीड़ित का कहना है कि जब उसने डॉक्टरों से सवाल किया कि रिपोर्ट में ऑपरेशन की जरूरत नहीं बताई गई थी,

निष्ठा अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने यहाँ जांच के दौरान बता दिया कि पत्नी की यूट्रेस और गाल ब्लेडर खराब हो चुके हैं लिहाजा आपरेशन करना पडेगा और इस बावत कुल एक लाख रूपया लिया और प्रार्थी को बिल निष्ठा हास्पिटल उन्नाव के द्वारा केवल बाइस हजार का थमा दिया।

इसके बाद उसकी पत्नी का आपरेशन के दौरान मौत होने पर पत्नी को मृत अवस्था में अस्पताल के कपड़ों में ही अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया।

 

पीड़ित द्वारा स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से शिकायत किए जाने पर एक जांच समिति गठित की गई। जांच टीम के नोडल अधिकारी / डिप्टी सीएमओ डा० नारेन्द्र सिंह ने रिपोर्ट में लिख दिया की साक्ष्य के आधार पर अस्पताल द्वारा कोई लापरवाही नही हुई

पीड़ित असंतुष्ट होकर न्यायालय की शरण लेकर दुबरा जांच टीम ने पूरे मामले की गहनता से पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ, जिसमें निष्ठा अस्पताल को पूरी तरह दोषी पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जांच में दोषी साबित होने के बावजूद अब तक आरोपियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही ।

 

इण्डिया एक्सप्रेस न्यूज से संजय सक्सेना की खास रिपोर्ट

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