हाथरस के टुकसान में हिंदू परिवार ने रोजा इफ्तार कराकर पेश की भाईचारे की मिसाल

हाथरस के टुकसान में हिंदू परिवार ने रोजा इफ्तार कराकर पेश की भाईचारे की मिसाल

 

 

हाथरस जनपद के थाना हाथरस गेट क्षेत्र के इगलास मार्ग पर स्थित गांव टुकसान में बुधवार को सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने समाज के सामने एकता का अनूठा उदाहरण पेश किया है। जहाँ एक ओर दुनिया धर्म और संप्रदायों के नाम पर बँटती नजर आती है, वहीं गांव के निवासी महेश चौधरी ने अपने आवास पर ‘रोजा इफ्तार’ का भव्य आयोजन कर यह साबित कर दिया कि इंसानियत का मजहब सबसे ऊपर है।

एक जाजम पर बैठे रोजेदार, साथ खुला रोजा

शाम होते ही महेश चौधरी के आवास पर गांव के मुस्लिम समुदाय के रोजेदारों का जमघट लगना शुरू हो गया। आयोजन की खास बात यह रही कि हिंदू परिवार के सदस्यों ने स्वयं आगे बढ़कर रोजेदारों की खिदमत की और उन्हें खजूर व अन्य व्यंजनों से रोजा इफ्तार कराया। मगरिब की अजान के वक्त जब एक साथ दर्जनों हाथ मुल्क में अमन, चैन और तरक्की के लिए दुआ में उठे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।

गंगा-जमुनी तहजीब का संगम

इस आयोजन में न केवल धार्मिक अनुष्ठान पूरा हुआ, बल्कि गांव की पुरानी परंपराओं की झलक भी देखने को मिली। गांव के बुजुर्गों ने साझा विरासत की बातें कीं, तो युवाओं ने इस पहल को सोशल मीडिया और समाज के लिए एक प्रेरणा बताया। आयोजन में मुख्य रूप से फतेह सिंह, कपिल चौधरी और सुबोध चौधरी सहित गांव के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना”

कार्यक्रम के आयोजक महेश चौधरी ने बताया “हमारे पूर्वजों ने हमें मिल-जुलकर रहना सिखाया है। त्योहार चाहे होली-दीवाली हो या ईद-रमजान, खुशियां बांटने से ही बढ़ती हैं। मेरा मकसद केवल अपने भाइयों के प्रति सम्मान प्रकट करना और समाज में प्रेम का संदेश देना था।”

गांव के निवासियों का कहना है कि टुकसान गांव हमेशा से अपनी शांतिप्रिय और मेल-मिलाप वाली संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। आज के इस आयोजन ने न केवल दिलों की दूरियां कम की हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया है।

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