*सैयद सालार मसूदे गाजी दरगाह शरीफ बहराइच में उमड़ा अकीदतमंदों का ऐतिहासिक जनसैलाब, “गाज़ी मियां जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा पूरा दरगाह शरीफ, ढोल-ताशों, चादरों, चांदी के मुकुट और मलंगों की दीवानगी ने बनाया रूहानी और यादगार माहौल, हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की दिखी अद्भुत मिसाल*
में हज़रत सैयद सालार मसूदे गाजी के दरबार पर इस बार अकीदतमंदों की ऐसी दीवानगी देखने को मिली कि पूरा दरगाह शरीफ “गाज़ी मियां जिंदाबाद”, “गाज़ी मियां सरकार की जय” और “सैयद सालार मसूदे गाजी अमर रहें” के नारों से देर रात तक गूंजता रहा। दूर-दराज़ राज्यों और जनपदों से लाखों की संख्या में पहुंचे जायरीन अपने साथ चांदी का मुकुट, चांदी का खंडवा, फूलों से सजी शानदार चादरें, काजू, बादाम, मिठाइयां, फल-फ्रूट और अकीदत के अनगिनत नजराने लेकर दरगाह शरीफ पहुंचे। हर तरफ बस अकीदत, मोहब्बत और गाज़ी मियां की शान में लगते नारों की गूंज सुनाई देती रही।
दरगाह शरीफ बहराइच की सरज़मीं पर सुबह से ही अकीदतमंदों का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा मेला क्षेत्र जायरीन से खचाखच भर गया। ढोल-ताशों की गूंज, मलंगों का जोश, चादरों का कारवां और गाज़ी मियां की शान में झूमते दीवानों ने पूरे माहौल को रूहानी, ऐतिहासिक और यादगार बना दिया। दूर-दूर से आए जायरीन नाचते, झूमते, चादर पेश करते और अकीदत के साथ दरबार में हाजिरी लगाते नजर आए। कई जायरीन अपने छोटे बच्चों को कंधों पर बैठाकर दरगाह शरीफ पहुंचे तो कई परिवार पूरी रात दरगाह परिसर में रहकर जियारत करते दिखाई दिए।
सबसे खास बात यह रही कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मेले की औपचारिक अनुमति नहीं दी गई, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार जायरीन को किसी भी प्रकार से रोका-टोका नहीं गया। अदालत के निर्देशों के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि सैयद सालार मसूदे गाजी दरगाह शरीफ बहराइच में सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपराएं, जियारत और रस्में शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहें।
करीब 500 वर्षों से अधिक पुरानी परंपराओं और अकीदत की इस ऐतिहासिक विरासत को निभाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से जायरीन बड़ी संख्या में दरगाह शरीफ पहुंचे। कोई परिवार के साथ आया, कोई दोस्तों के साथ, तो कोई मलंगों और अकीदतमंदों के कारवां के साथ ढोल-ताशों पर झूमते हुए दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचा। पूरा बहराइच “सैयद सालार मसूदे गाजी जिंदाबाद” के नारों से गूंजता नजर आया।
हिन्दू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की सबसे बड़ी पहचान बने सैयद सालार मसूदे गाजी दरगाह शरीफ बहराइच में इस बार भी दोनों समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हिन्दू और मुस्लिम अकीदतमंद एक साथ ढोल-ताशों के बीच झूमते नजर आए। कोई चादर लेकर पहुंचा, कोई मिठाइयां लेकर आया, तो कोई अपने बच्चों के साथ गाज़ी मियां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचा। पूरा मेला क्षेत्र भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बना नजर आया।
जायरीन की दीवानगी का आलम ऐसा था कि लोग कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर दरगाह शरीफ पहुंचे। गाज़ी मियां की शान में लोग नारे लगाते, झूमते और मलंगों के साथ अकीदत में डूबे दिखाई दिए। चांदी के मुकुट और चांदी के खंडवा ने पूरे आयोजन की रौनक को और बढ़ा दिया। चारों ओर फूलों की खुशबू, ढोल की थाप और नारों की गूंज ने माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया। कई अकीदतमंद रातभर कव्वाली, इबादत और जियारत में मशगूल दिखाई दिए।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बहराइच पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और अलर्ट मोड में नजर आया। आने वाले जायरीन को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए पूरे मेला क्षेत्र, दरगाह परिसर, मुख्य मार्गों, पार्किंग स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। चारों ओर पुलिस बल की तैनाती, लगातार गश्त, वायरलेस निगरानी और सुरक्षा चेकिंग के चलते पूरा क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित दिखाई दिया।
मेला प्रभारी दरगाह शरीफ बहराइच ब्रह्मा गौंड
इतनी विशाल भीड़ के बीच मेला प्रभारी दरगाह शरीफ बहराइच ब्रह्मा गौंड की कार्यशैली, प्रशासनिक क्षमता, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और चौबीसों घंटे की सक्रिय निगरानी पूरे आयोजन की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई। लाखों की भीड़ के बावजूद जिस तरह उन्होंने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था और जायरीन की सुविधाओं को संभाला, उसे लोगों ने ऐतिहासिक, शानदार और मिसाल बताया।
मेला प्रभारी ब्रह्मा गौंड सुबह से देर रात तक लगातार पूरे मेला क्षेत्र, दरगाह परिसर, मुख्य मार्गों, पार्किंग स्थलों और संवेदनशील स्थानों का पैदल भ्रमण करते नजर आए। हर गतिविधि पर उनकी पैनी नजर बनी रही। वह लगातार पुलिस टीम को दिशा-निर्देश देते रहे और हर व्यवस्था को खुद मॉनिटर करते दिखाई दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अलग लाइन व्यवस्था, मजबूत बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी की व्यवस्था कराई गई।
शैलेन्द्र कुमार यादव — प्रभारी मेला QRT
प्रभारी मेला QRT शैलेन्द्र कुमार यादव पूरे आयोजन के दौरान अपनी टीम के साथ हर समय अलर्ट मोड में नजर आए। अचानक बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना, संवेदनशील स्थानों पर तत्काल पहुंचना, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखना और जायरीन को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी रही।
QRT टीम लगातार वायरलेस सेट और आधुनिक संचार व्यवस्था के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी करती रही। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलते ही शैलेन्द्र कुमार यादव अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करते नजर आए। महिलाओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, लाइन व्यवस्था और जायरीन की सहायता को लेकर उनकी सक्रियता पूरे आयोजन में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
गाज़ी मियां के दरबार में उमड़ी भारी भीड़ के बीच प्रभारी मेला QRT शैलेन्द्र कुमार यादव और उनकी टीम हर समय तत्पर और सक्रिय दिखाई दी। किसी भी प्रकार की अफवाह, अव्यवस्था या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाती रही। उनकी तेज कार्यशैली और मजबूत निगरानी व्यवस्था ने पूरे आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सहयोगी टीम
उप निरीक्षक सुरेन्द्र बौद्ध
उप निरीक्षक हरेराम
उप निरीक्षक सुभाष यादव
आरक्षी मनीष यादव
आरक्षी सुनील कुमार
मौके पर आसिफ सिद्दीकी पत्रकार समाजसेवी और उनकी टीम भी लगातार पूरी रात कवरेज करती नजर आई।
अपनी टीम के साथ देर रात तक दरगाह शरीफ के हर कोने से लाइव कवरेज, जायरीन की भीड़, चादर जुलूस, ढोल-ताशों की गूंज, सुरक्षा व्यवस्था और गाज़ी मियां के दरबार में उमड़ी अकीदतमंदों की दीवानगी को कैमरे में कैद करते नजर आए।
आसिफ सिद्दीकी और उनकी टीम लगातार भीड़भाड़ वाले इलाकों, मुख्य मार्गों, दरगाह परिसर और मेले के हर प्रमुख स्थान पर मौजूद रही। पूरी रात उन्होंने जायरीन से बातचीत कर माहौल की रूहानियत, भाईचारे और मोहब्बत की तस्वीर लोगों तक पहुंचाई। उनकी टीम की सक्रियता और लगातार कवरेज भी पूरे आयोजन में चर्चा का विषय बनी रही।
दरगाह शरीफ पहुंचे हजारों जायरीन और स्थानीय लोगों ने खुलकर कहा कि इतनी विशाल भीड़ के बावजूद जिस तरह पूरी व्यवस्था संभाली गई, वह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। लोगों ने पुलिस प्रशासन, मेला प्रभारी ब्रह्मा गौंड, प्रभारी मेला QRT शैलेन्द्र कुमार यादव और पूरी टीम की कार्यशैली, व्यवहार, तत्परता और मेहनत की जमकर सराहना की।
सैयद सालार मसूदे गाजी दरगाह शरीफ बहराइच में उमड़ी भारी भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बह्राइच की सरज़मीं आज भी गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल है। पूरा दरगाह शरीफ “गाज़ी मियां जिंदाबाद” के नारों, ढोल-ताशों की गूंज, कव्वालियों की आवाज और अकीदतमंदों की दीवानगी से देर रात तक झूमता रहा।