रायबरेली,

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ब्यूरो–अकरम उस्मान, रायबरेली

 

 

स्लग–बच्चों की चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का हुआ खुलास, पुलिस ने 9 आरोपी को किया गिरफ्तार

 

 

कोतवाली नगर पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए बच्चा चोरी कर बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है | पुलिस ने इस मामले में चार महिलाओं समेत नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जो उत्तर प्रदेश के रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा के अलावा उत्तराखंड और बिहार के रहने वाले हैं | इनके कब्जे से रायबरेली रेलवे स्टेशन से चोरी हुआ नौ माह का मासूम सकुशल बरामद कर लिया गया है | बुधवार को पुलिस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने बताया कि विगत 13 मई को मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला अंतर्गत बदोगढ़ बाबा खेड़ा निवासी एक महिला ने बच्चा चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, महिला अपने पति के साथ दिल्ली में रहती थी | बीते 12 मई को वह पति से नाराज होकर अपने दो साल और नौ महीने के दो बच्चों को लेकर मायके सिंगरौली, मध्य प्रदेश जाने के लिए निकली थी | लखनऊ से ट्रेन में एक महिला और पुरुष उसके साथ बैठे और मेल जोल बढ़ा लिया, रायबरेली स्टेशन पर ट्रेन रुकने पर उक्त महिला ने नौ माह के बच्चे को खिलाने के बहाने गोद में ले लिया | इसके बाद बहला फुसलाकर वे पीड़ित महिला को स्टेशन के बाहर एक होटल पर खाना खिलाने ले गए, जहां मौका पाकर दोनों बच्चे को लेकर रफू चक्कर हो गए | जबकि रोती बिलखती मां जब कोतवाली पहुंची, तो पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की और CCTV और सर्विलांस की मदद से गिरोह तक पहुंचे साथ ही सात दिनों के भीतर गिरोह के नौ सदस्यों को दबोच लिया | पुलिस द्वारा बच्चा चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया हैं जिनमें 4 महिलाओं सहित 9 लोग गिरफ्तार हुए हैं | पुलिस अधीक्षक ने बताया कि धरपकड़ और जांच के दौरान पुलिस के हाथ 15 दिन का एक और नवजात बच्चा लगा है | हालांकि, इस बच्चे को लेकर एक दंपती का दावा है कि यह बच्चा उनका है और उन्होंने इसे दान में दिया था | पुलिस इस दावे की भी गहनता से पड़ताल कर रही है | पुलिस अधीक्षक रवि कुमार के मुताबिक, यह गिरोह ढाई लाख में बिका बच्चा आपस में भिड़े जब पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की तो कई तथ्य प्रकाश में आए कि रायबरेली स्टेशन से चोरी किया गया नौ माह का बच्चा मुरादाबाद निवासी संजय कुमार को ढाई लाख रूपये में बेचा गया था | इस रकम में से एक लाख रूपये बच्च चुराने वाले राम कुमार और उसकी पत्नी रेशमा को मिले थे | पैसों के इसी बंटवारे को लेकर गिरोह के अन्य सदस्यों का आपस में विवाद भी हुआ था | इससे पहले सुमित ने एक अन्य खरीदार से भी इस बच्चे की डील तय की थी, लेकिन कानूनी कागजात लीगल पेपर्स न होने के कारण उस व्यक्ति ने बच्चा खरीदने से मना कर दिया था | जबकि गिरोह के अन्य सदस्य विभिन्न अस्पतालों, कस्बों और आइ वी एफ सेंटरों में काम करने वाली आशा बहुओं व ए एन एम से संपर्क साधते थे | वहां से वे ऐसे निसंतान दंपतियों की सूची और जानकारी जुटाते थे, जिन्हें बच्चे की चाहत होती थी | इसके बाद ब्रम्हपाल के क्लीनिक का कंपाउंडर सुमित और दाई किरण जीत बच्चों की मांग के अनुसार बिहार के अररिया के राम कुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा को एक्टिव करते थे | राम कुमार और रेशमा रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सार्वजनिक जगहों पर अकेली महिलाओं को टारगेट कर दोस्ती गांठते थे और मौका मिलते ही बच्चे को लेकर फरार हो जाते थे | पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से 9 माह का बच्चा सकुशल बरामद किया हैं साथ ही घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद की गई हैं पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों को लेकर जाँच में जुट गई हैं अन्य वैधानिक कार्यवाही प्रचलित हैं | पुलिस की इस त्वरित और बड़ी सफलता पर पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने टीम को 25 हजार रूपये इनाम देने की घोषणा की गई है |

 

 

ब्यूरो–अकरम उस्मान, रायबरेली

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